बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी

31 07 2006

बात निक्लेगी तो दूर तलक जायेगी

लोग बेवजह उदासी का सबब पूछेगें

यह भी पूछेगें कि तुम इतनी परेशान क्यूं हो

उगलियां उठेगी सूखे हुये बालों की तरफ़

एक नजर देखगे गुजरे हुये सालो की तरफ़

चूडियों पर भी कई तज किये जायेगे

कापते हाथो पे भी फ़िकरे कसे जायेगे

लोग जालिम हैं हर बात का ताना देगें

बातो बातो में मेरा जिक्र भी ले आयेगें

उनकी बातो का जरा सा भी असार मत लेना

वरना चेहारे के तासुवर से समझ जायेगें

चाहे कुछ भी हो सवालात न करना उनसे

मेरे बारे मे कोई बात न करना उनसे

बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी।





वो कौन है दुनियाँ मे जिसे गम नही होता

31 07 2006

वो कौन है दुनियाँ मे जिसे गम नही होता
किस घर मे खुशी होती है मातम नही होता
वो कौन है दुनिया मे जिसे गम नही होता
ऐसे भी है दुनिया में जिन्हें गम नही होता
एक गम है हमारा जो कभी कम नही होता
वो कौन है दुनिया में जिसे गम नही होता
क्या सूरमाँ भरी आंखो से आसूँ नही गिरते
क्या मेहँदी लगी हाथों से मातम नही होता
वो कौन है दुनिया में जिसे गम नही होता
किस घर में खुशी होती है मातम नही होता
वो कौन है दुनिया में जिसे गम नही होता
कुछ और ही होती है बिगडनें के अदायेँ
बनने मे सवँरने में आलम नही होता
वो कौन है दुनिया में जिसे गम नही होता
किस घर में खुशी होती है मातम नही होता
वो कौन है दुनिया में जिसे गम नही होता