कभी खामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे

1 08 2006

कभी खामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे
कभी खामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे ,मै उतना याद आऊंगा मुझे जितना भूलाओगे
कभी खामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे

कोई जब पूछ बैठेगा खामोशी का सबब तुमसे
कोई जब पूछ बैठेगा खामोशी का सबब तुमसे ,बहुत समझाना चाहोगे मगर समझा ना पाओगे
मै उतना याद आऊंगा मुझे जितना भूलाओगे
कभी खामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे

कभी दुनिया मुकम्मल बन आएगी निगाहो मे
कभी दुनिया मुकम्मल बन आएगी निगाहो मे , कभी मेरी कमी दुनिया की हर एक शह् बेमानी है
मै उतना याद आऊंगा मुझे जितना भूलाओगे

कही पर भी रहे हम तो मुहब्बत फिर मुहब्बत है
कही पर भी रहे हम तो मुहब्बत फिर मुहब्बत है ,तूम्हे हम याद आएगे हमे तुम याद आओगे
तूम्हे हम याद आएगे हमे तुम याद आओगे -2

कभी खामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे
मै उतना याद आऊंगा मुझे जितना भूलाओगे
कभी खामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे