तुम हमारे नहीं तो क्या गम है

6 08 2006

तुम हमारे नहीं तो क्या गम है

हम तुम्हारे तो हैं यह क्या कम है

मुस्करा दो जरा खुदा के लिये

शमे महफ़िल मे रोशनी कम है

तुम हमारे नही तो क्या गम है

हम तुम्हारे तो है यह क्या कम है

बन गया है यह जिन्दगी अब तो

तुझ से बढ  कर हमे तेरा गम   है

तुम हमारे नही तो क्या गम है

हम तुम्हारे तो है यह क्या कम है


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One response

26 10 2006
Amarjeet Singh

यह गज़ल मुझे बहुत पसन्द है

तुम हमारे नहीं तो क्या गम है
हम तुम्हारे तो हैं यह क्या कम है

बस एक कमी रह गयी थी इस अल्बम मे म्युजिक जगजीत का नही था

अमर
http://jagjitsingh.wordpress.com

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