तुम हमारे नहीं तो क्या गम है
हम तुम्हारे तो हैं यह क्या कम है
मुस्करा दो जरा खुदा के लिये
शमे महफ़िल मे रोशनी कम है
तुम हमारे नही तो क्या गम है
हम तुम्हारे तो है यह क्या कम है
बन गया है यह जिन्दगी अब तो
तुझ से बढ कर हमे तेरा गम है
तुम हमारे नही तो क्या गम है
हम तुम्हारे तो है यह क्या कम है
यह गज़ल मुझे बहुत पसन्द है
तुम हमारे नहीं तो क्या गम है
हम तुम्हारे तो हैं यह क्या कम है
बस एक कमी रह गयी थी इस अल्बम मे म्युजिक जगजीत का नही था
अमर
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