वन्दे मातरम्

7 09 2006

वन्दे मातरम्

सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्

शस्य श्यामलां मातरम् ।

शुभ्र ज्योत्स्न पुलकित यामिनीम

फुल्ल कुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,

सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम् ।

सुखदां वरदां मातरम् ॥ वन्दे मातरम्…

सप्त कोटि कन्ठ कलकल निनाद कराले

निसप्त कोटि भुजैब्रुत खरकरवाले

के बोले मा तुमी अबले

बहुबल धारिणीं नमामि तारिणीम्

रिपुदलवारिणीं मातरम् ॥ वन्दे मातरम्…

तुमि विद्या तुमि धर्मं, तुमि ह्रदि तुमि मर्मं

त्वं हि प्राणाः शरीरे

बाहुते तुमि मा शक्ति,

ह्रदये तुमि मा भक्ति,

तोमारे प्रतिमा गडि मंदिरे मंदिरे ॥ वन्दे मातरम्…

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी

कमला कमलदल विहारिणी

वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्

नमामि कमलां अमलां अतुलाम्

सुजलां सुफलां मातरम् ॥ वन्दे मातरम्…

श्यामलां सरलां सुस्मितां भुषिताम्

धरणीं भरणीं मातरम् ॥ वन्दे मातरम्





प्यार का पहला खत लिखने में वक्त तो लगता है

4 09 2006

प्यार का पहला खत लिखने में वक्त तो लगता है।
नये परिदों को उडने में वक्त तो लगता है।
जिस्म की बात नहीं थी उनके दिल तक जाना था ।
लम्बी दूरी तय करने में वक्त तो लगता है।
प्यार का पहला खत लिखने में वक्त तो लगता है।
गाठं अगर लग जाय तो फ़िर रिशते हो या दूरी
लाख करे कोशिश खुलने में वक्त तो लगता है।
प्यार का पहला खत लिखने में वक्त तो लगता है।
नये परिदों को उडने में वक्त तो लगता है।
हमने इलाजे जख्में दिल में ढूंढ लिया लेकिन
गहरे जख्मों को भरने मे वक्त तो लगता है।
प्यार का पहला खत लिखने में वक्त तो लगता है।
नये परिदों को उडने में वक्त तो लगता है।








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